एक ज्ञानी संत,अपने शिष्यों के साथ बैठे सत्संग कर रहे थे. संत ने अपने शिष्यों से पूछा :- क्या आप लोग जानते हैं कि 'हम गुस्से में इतना क्यों चिल्लाते हैं? क्यों लोग एक दूसरे पर जोर से चिल्लाते हैं?
चेलो ने अपने अपने हिसाब से अनेक जवाब दिये. मगर संत को संतुष्ट नहीं कर सके.
फिर संत ने दुबारा पूछा : क्या आप बता सकते हैं कि जब दो लोगों में प्यार हो जाता है ? तब वो एक दूसरे पर चिल्लाते नहीं अपितु धीरे, और कोमलता से बात करते हैं क्यों?
अब शिष्यों ने आश्चर्य से पूछा : क्यों गुरुदेव?
संत बोले - क्योंकि प्यार मे उनके दिल बहुत करीब गये हैं. उनके बीच की दूरी बहुत छोटी है ...अब उनको चिलाकर बात करने की जरुरत ही नही रह गई है.
संत बोले : इस दशा मे वे बोलते नहीं केवल बुदबुदाते है और एक दुसरे के दिल के और भी करीब होते जाते हैं. और अंत में उन्हें धीरे धीरे बोलने की भी ज़रूरत नहीं है, वे केवल एक दूसरे को देखते है और एक दुसरे की बात समझ जाते हैं .
तो प्यार मे लोग इतने करीब हो जाते हैं की बिना बोले भी सब समझ जाते हैं. यानि मौन की भाषा भी समझ आने लगती है.
जब कभी आप किसी से बहस करते है इतनी न करे की दिलो मे दुरिया बढ जाये. और ऐसे अपमान जनक शब्दों का इस्तेमाल ना करें की ये दूरियां उस हद तक पहुंच जाएँ जहाँ से वापस आने का कोई रास्ता ही न मिले.
अच्छा तो अब अगले सप्ताह फ़िर मिलते हैं, तब तक के लिये अलविदा. -Seema Gupta संपादक (प्रबंधन) |
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