मैं हूं हीरामन
राम राम ! सभी भाईयों और बहनों को.
आज के प्रथम विदूषक का खिताब जाता है श्री नीरज गोस्वामी जी को
April 18, 2009 9:53 AM भाई ताऊ ऐ के कर दिया तमने...सुभा सुभा दिमाग में घमासान चलन लाग री है... घणी जोर की... पूछो क्यूँ...न भी पूछो तो भी बताऊंगा ही...ताऊ एक दिमाग के रया की ये डीग के महल हैं जो भरत पुर के पास है... दूसरा दिमाग इसे लखनऊ का बड़ा इमामबाडा बता रया है...के करूँ...
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द्वितिय स्थान पर हैं :
April 18, 2009 2:18 PM रामप्यारी ये तूने क्या कर दिया ?...मुझे तो दोनों में से कोई भी जवाब नहीं आता था पर ये कैसा क्लू है...तुमने तो क्लू के नाम पर एक पर्चा ही लीक कर दिया..मसीही छायावती न..न..न.. मायावती के राज में मुग़लिया वास्तुकला का ये गम जाने वाला नमूना लखनऊ के इमामबाड़े के अलावा और क्या हो सकता है..., बोनस सवाल भी लीक कर दो न, देखी जायेगी ... मेरी ओर से ढेर सारी चाकलेट (और ताऊ की ओर से डंडा..) और हाँ, एक बात और...तुमने पूछा था कि मुझे कार्टूनों के ऐसे ऐसे आइडिये कहाँ से आते हैं तो, तुम्हारी इस, केवल मेरे लिए प्रायोजित विशेष पहेली का जवाब बस इतना सा है कि मैं भी तुम्हारी ही तरह थोड़ा सा शरारती हूँ इसीलिए मुझे भी ऐसी बदमाशियां सूझती रहती हैं .-:)
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और तृतिय स्थान पर हैं:
April 18, 2009 4:49 PM ताऊ
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और आज का चौथा स्थान जाता है :
April 18, 2009 6:44 AM रामप्यारी तेरे हिंदी वाले सवाल का क्या जबाब दे ताऊ की पहेली का जबाब खोजने में इतना दिमाग खर्च हो गया कि तेरे सवाल का जबाब देने के लिए कुछ बचा ही नहीं ! |
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